(hi) गुरु सियाग योग

  • गुरु सियाग योग पूर्णतः निःशुल्क है।
  • कोई डाइरेक्ट या इंडाइरेक्ट रूप से दान या लेन देन नहीं |
  • कोई भेंट पूजा नहीं है|
  • किसी भी प्रकार का रजिस्ट्रेशन नहीं है।
  • कोई कोर्स या ट्रेनिंग सेशन नहीं है|
  • कुछ भी नहीं ख़रीदना है|
  • इस योग में किसी भी प्रकार का कर्मकाण्ड नहीं हैं।
  • मंत्र दीक्षा के लिए कहीं आना जाना नहीं है| मंत्र दीक्षा विडियो / आडियो सी.डी. से, टी.वी. से, ई- मेल से भी पूरी तरह कार्य करती है।
  • ध्यान के लिए किसी एकांत की ही ज़रूरत नहीं है| ध्यान घर, ऑफिस, गाड़ी आदि कहीं पर भी किया जा सकता है| ध्यान किसी भी दिशा में बैठकर कर सकते हैं|
  • किसी भी प्रकार की कसरत नहीं करनी है| वे क्रियाएं जो आप के शरीर के लिये आवश्यक हैं, वह ध्यान के दौरान कुण्डलिनी जागरण द्वारा स्वतः होंगी। यह सभी धर्मों, जातियों, पंथों, वर्गों, सम्प्रदायों आदि के लिये है।
  • इस योग का सम्बन्ध किसी धर्म से नहीं है। जिस तरह गणित या विज्ञान या डॉक्टर का सम्बन्ध किसी धर्म से नहीं होता, उसी प्रकार गुरु सियाग योग भी अध्यात्म का एक विज्ञान है, यह सम्पूर्ण मानवता के लिए है।
  • कुन्डलिनी शक्ति मातृ-शक्ति होती है. जिस प्रकार माँ, कभी भी बच्चे का नुकसान न तो चाहेगी ओर ना ही होने देगी| इस योग को 5 वर्ष से लेकर किसी भी उम्र के व्यक्ति कर सकते हैं|
  • इस योग में किसी भी प्रकार कि पूर्व जानकारी आवश्यक नहीं है| जरूरत है तो केवल इच्छा-शक्ति की | जैसे सूर्य, बादल, हवा, पानी आदि – अनपढ़ और साइंटिस्ट, दोनों को समान लाभ देते हैं; किसी भी प्रकार का भेद-भाव नहीं करते| इसी प्रकार गुरु सियाग योग में भी किसी पूर्व ज्ञान की आवश्यकता नहीं है|
  • ध्यान आप किसी भी समय, जो आपको सुविधाजनक हो, कर सकते हैं। ध्यान सुबह किसी भी समय जगने के बाद से दोपहर तक किसी भी समय और शाम से सोने तक कभी भी कर सकते हैं| २४ घंटे में कम से कम दो बार (सुबह – शाम) अवश्य करना हैं। सुविधानुसार समय रोज बदल सकते हैं| ठंडे प्रदेशों में या कोई ज़्यादा परेशानी होने पर ध्यान अधिक समय तक या दो बार से अधिक भी किया जा सकता है।
  • केवल 15 मिनट के ध्यान लिए प्रार्थना करके ध्यान आरम्भ करना है। यदि समय अपने आप १५ मिनट से ज़्यादा हो जाता है तो भी चिंता ना करें। 15 मिनट से पहले आँखे ना खोलें| आरम्भ के दिनों में अलार्म लगाया जा सकता है।
  • आवश्यकता होने पर या किसी कारणवश आप ध्यान के बीच उठ सकते हैं। अपना कार्य समाप्त कर पुनः ध्यान के लिये बैठ सकते हैं।
  • आप फ़र्श, कुर्सी, सोफे या बिस्तर पर बैठकर ध्यान कर सकते हैं। आरम्भ में हो सके तो कोई सहारा ना लें। कई बार ध्यान के समय सिर या शरीर पीछे की तरफ जाना चाहता है, तो इस मूवमेंट में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। कई लोगों के अनुभव हैं कि जब वे सहारा लेकर बैठ कर ध्यान करते थे, तो सिर में भारीपन आ जाता था। आपका शरीर चारों ओर से मूवमेंट के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। वैसे किसी भी सुविधाजनक स्थिति में बैठ सकते हैं।
  • खाने-पीने, सिगरेट, तमाखू आदि (शाकाहारी – मांसाहारी) का कोई बंधन नहीं है| कुछ भी छोड़ने की जरूरत नहीं है। मंत्र एवं ध्यान की शक्ति आपको उस वस्तु से अपने आप दूर कर देती है जो आप के शरीर के लिये हानिकारक है या जिनको आप छोड़ना चाहते हो। ध्यान व मंत्र में शक्ति होगी तो नुकसान करने वाली चीजें अपने आप छोड़ जाएँगी। इसे इस प्रकार समझा जा सकता है कि सूरज, हवा, पानी, बादल, फूल आदि प्राकृतिक चीजें कभी कोई बंधन नहीं लगाती। आप चाहे मांस खाएं, शराब पीएं, अच्छा-बुरा करें, फिर भी सूरज, हवा, पानी, बादल, फूल आदि आपको किसी भी चीज से वंचित नहीं करते, तो फिर ईश्वरीय शक्ति आप पर बंधन क्यों लगायेगी? गुरु सियाग योग विधि में कुछ भी छोड़ने का बंधन नहीं है। महिलाएं भी इस ध्यान को महीने के तीसों दिन कर सकती हैं।
  • आपको अपने वर्तमान रहने के तरीके या दिनचर्या में कोई परिवर्तन नहीं करना है और न आपको रहने का कोई नया तरीका अपनाना है। जो कुछ आप ध्यान आरम्भ करने से पहले कर रहे थे, उसे जारी रखें। यानी 24 घंटे में से 23 घंटा 30 मिनट आप चाहे जो करें बस कोई से 15 – 15 मिनट दो बार का ध्यान करना है|
  • ध्यान व मंत्र-जाप किसी दूसरे (जो स्वयं करने में अक्षम हो जैसे छोटे/नासमझ बच्चे) के लिए भी किया जा सकता है। उस व्यक्ति के लिये भी ध्यान कर सकते हैं जो आपके दिल के बहुत करीब हो, जिसके बारे में आप बहुत चिंता करते हैं। जो आपके अत्यधिक करीब हो, जिसको आप हृदय की गहराइयों से चाहते हों| ऐसे व्यक्ति आपके माता – पिता, भाई – बहिन, पति/पत्नी, रिश्तेदार, मित्र आदि कोई भी हो सकते हैं जिनसे आपका मजबूत आन्तरिक बंधन हो|
  • गुरुदेव ऐसा कभी नहीं कहते कि गुरु छोड़ दोगे तो पाप लगेगा। गुरु सियाग का कथन – कि मुझे छोड़कर किसी और को गुरु बना लो और तुम्हारा काम न हो तो फिर शुरू कर लेना। यानी ध्यान और मंत्र जाप पुनः शुरू कर देना। परिणाम आने लगेंगे।
  • गुरु सियाग योग में विपरीत असर कभी नहीं होते। लेकिन नियमित न करने से गुरु सियाग योग के फायदे आपको बहुत ही धीमी गति से अनुभव होंगे।
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