समर्थ गुरु सियाग का क्या अर्थ है?
‘समर्थ गुरु’ का मतलब है जिनकी भौतिक उपस्थिति के बिना फोटो मात्र से भी दुनिया के किसी भी कोने में ध्यान लगता है, एवं कुण्डलिनी शक्ति जागृत हो जाती है। समर्थ गुरु शिष्य पर किसी भी प्रकार का कर्मकांड का बंधन नहीं लगाते हैं। समर्थ गुरु सर्वव्यापी होता है| गुरु के बताए मार्ग पर चलने से ‘चेतन शक्ति’ अंदर से गाइड करती है |
जैसे अगर तार पतला या सही क्वालिटी का नहीं है तो भी बल्ब नहीं जलेगा या फ्यूज उड़ जायेगा, अर्थात तार भी सही क्वालिटी का होना चाहिए। इसी प्रकार गुरु भी समर्थ होना चाहिए। तभी वह ईश्वरीय शक्ति का अहसास करा पायेगा। समर्थ का मतलब उपलब्ध या एनलाईटण्ड, सगुण साकार एवं निर्गुण निराकार, दोनों सिद्धियाँ प्राप्त, जिसके फोटो मात्र से भी दुनियाँ में कहीं भी ध्यान लगे, जो आपको हर प्रकार के बन्धनों या आडम्बर से मुक्त रखे, वही गुरु समर्थ कहलाता है। ये सब सामर्थ्य (गुण) गुरु सियाग विधि के मंत्र एवं ध्यान में हैं। समर्थ गुरु की बताई गई विधि भी विश्व के किसी भी कोने में बिना आए जाए या मिले परिणाम देती है।
गुरु सियाग को सगुण साकार (कृष्ण) एवं निर्गुण निराकार (गायत्री) की सिद्धि प्राप्त है, दोनों तरह की सिद्धियां एक ही जन्म में प्राप्त होने से, गुरुदेव के फोटो के ध्यान मात्र से भी कुण्डलिनी जागृत होती है। अन्य तरीके से ध्यान तो लगाता पर उस ध्यान से कुण्डलिनी जागरण नहीं होता |

