दिन की शुरुआत हमारे पूरे दिन के मूड को निर्धारित करती है। अधिकांश घरों में सुबह का समय बहुत व्यस्त होता है—काम या स्कूल जाने की तैयारी करना, टिफ़िन पैक करना, और दिनभर के कार्यों की तैयारी करना आदि। ऐसे समय में यदि घर पर या काम पर जाते हुए रास्ते में किसी से बहस हो जाए, तो उसका असर पूरे दिन दिमाग़ में बना रहता है| उस दिन किसी की भी छोटी सी बात या मजाक अच्छा नहीं लगता| धीरे धीरे शाम तक मूड बिगड़ता चला जाता है, जिसका असर आपसी संबंधों पर भी पड़ता है|
लेकिन यदि हमारे दिन की शुरुआत शांति के साथ हो, तो पूरा दिन अच्छा निकलता है। यह तभी संभव है जब हम दिन के किसी भी कार्य को करने से पहले सुबह-सुबह, सबसे पहले ध्यान करें। सुबह के समय एक विशेष शांति होती है—प्रकृति अभी जाग ही रही होती है, वातावरण शांत होता है। सुबह के ध्यान के समय हम ईश्वर/गुरु से प्रार्थना कर सकते हैं कि वे हमें शांति से भर दें। जब हम इस प्रार्थना के साथ नियमित ध्यान करते हैं, तो शांति हमारे भीतर अधिक गहराई तक स्थापित होने लगती है।
फिर यदि दिन में किसी प्रकार की अशांति या तनावपूर्ण स्थिति भी आ जाए, तो हमारे भीतर स्थापित यह शांति हमें आसानी से अशांत नहीं होने देती। हमारे अंदर की शांत की तरंगे पूरे शरीर और मन में फैल जाती हैं इस कारण किसी भी अशांति या अनबन की स्थिति होने के बाद भी हम जल्दी ही अपनी खोई हुई शांति प्राप्त कर लेते हैं। आपको महसूस होगा कि जिन छोटी छोटी बातों से पहले मन अशांत होता था, वह अब नहीं होता|
एक शांत आंतरिक केंद्र हमें अच्छे और अधिक उचित निर्णय लेने में भी सहायता करता है, ऐसे निर्णय जो क्रोध, ईर्ष्या या बदले की भावना से भरे हुए नहीं होते। हम अपने आस पास ऐसी शांति फैलाने लगते हैं कि न केवल हमारी समस्याएँ जल्दी सुलझने लगती हैं, बल्कि हमारे जीवन में ऐसे लोग भी आने लगते हैं जो हमारे विकास में मदद करते हैं और सहयोगी बन जाते हैं।
इस समय एक और घटना होती है—हमारा अंतर्ज्ञानी (इंट्यूटिव) मन जागने लगता है। मन का कार्य लगातार जानकारी को ग्रहण करना और पैटर्न पहचानकर हमें जानकारी देना है, संभावित खतरों से सावधान करना है, आगे आने वाली संभावनाओं के प्रति जागरूक करना है, और पुरानी यादों और स्मृतियों को एकत्रित रखना है| हमें भावनात्मक और शारीरिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए हमारा मन इन्हीं सब पुराने विचारों को मिक्स/प्रोसेस करके जरूरत के समय समय सामने लाकर रख देता है। संक्षेप में, मस्तिष्क नए विचार उत्पन्न नहीं करता, बल्कि पूर्व में इकट्ठी जानकारी वह एकत्र करता है उसे ही प्रोसेस करके नए रूप में प्रस्तुत करता है। और हमे लगता कि कोई नया विचार आया है|
जब हम ध्यान करते हैं, तो हमारा अंतर्ज्ञानी मन — (जो हम सभी में जन्म से होता है और जिसका उपयोग हम बचपन में अधिक करते हैं, लेकिन वह अन्तर्ज्ञानी मन हमारे अनिश्चित तार्किक मन द्वारा तर्क देकर दबा दिया जाता है) — इस ध्यान से वह अंतरज्ञानी मन फिर से जागने लगता है और हमें शांति के क्षणों में संकेत देने लगता है। उदाहरण के लिए, हम किसी दिन कुछ लोगों या जगह पर मीटिंस तय करते हैं, लेकिन अंतर्ज्ञान कह सकता है कि आखिरी दो मीटिंग्स को केंसिल कर देते हैं और इसके बजाय कुछ और करें। यदि हम उस आंतरिक “आवाज़” को सुनकर उसके आधार पर निर्णय लें, तो हम पाएँगे कि वह हमें हमारी किसी समस्या के हल की और ले जाती है या किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने का मौक़ा देती है जो हमारी किसी पुरानी समस्या को हल करने में मदद करता है।
हमारा प्रातःकालीन ध्यान हमें ऐसी ऊर्जा से भर देता है जो भोजन से मिलने वाली ऊर्जा से बिल्कुल अलग होती है। यह ऊर्जा शक्तिशाली और गतिशील होती है, साथ ही शांतिपूर्ण भी। यह हमें सकारात्मक, उत्साहित और हिम्मती बनाए रखती है, भले ही परिस्थितियाँ कितनी भी तनावपूर्ण या चुनौतीपूर्ण क्यों ना हों। इसका सकारात्मक प्रभाव हमारे आसपास के लोगों पर भी पड़ता है, जिससे परिस्थितियाँ हमारे पक्ष में बनने लगती हैं। उदाहरण के लिए, कोई रूखा सहकर्मी या सहयोगी हमारे प्रति अधिक प्रेमपूर्ण व्यवहार करने लगता है। हमें ऐसे मौके मिलते हैं जो न केवल हमारी प्रगति को बढ़ाते हैं बल्कि बहुत कम तनाव वाले होते हैं।
जैसे सुबह का ध्यान हमें पूरे दिन के लिए ऊर्जा और शांति प्रदान करता है, उसी प्रकार शाम का ध्यान एक छलनी (फ़िल्टर) की तरह कार्य करता है जो पूरे दिन में एकत्र हुई अनावश्यक जानकारी को छानकर अलग कर देता है। सामान्य धारणा के विपरीत, ध्यान का उद्देश्य आपको विचारहीन बनाना नहीं है, बल्कि विचारों के प्रति जागरूक बनाना है और उन विचारों को हटाना है जो आपकी प्रगति में बाधा बनते हैं। हमारी इंद्रियाँ पूरे दिन मन तक जानकारी पहुँचाती रहती हैं और मन उन सभी को प्रोसेस करके बहुत-सी बातों को सचेत और अवचेतन रूप से इकट्ठी कर लेता है। शाम का ध्यान एक प्रकार का मन के विचारों की साफ-सफाई का तरीका है, जो मन से बेकार जानकारी, गलत प्रतिक्रियाएँ, भ्रांत धारणाएँ और तनाव को दूर कर देता है। आपको एक प्रकार से रिसेट कर देता है| इससे आप हल्के मन से सोते हैं और अगली सुबह नई ऊर्जा के साथ जागते हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी गहरे अनुभव तभी प्राप्त हो सकते हैं जब ध्यान पूरी ईमानदारी और समर्पण से किया जाए। यदि साधक इसे केवल आदत या औपचारिकता के रूप में करता है, या घड़ी पर नज़र रखते हुए जल्दी-जल्दी दिन की शुरुआत करने की जल्दी में होता है, तो ध्यान का प्रभाव वह नहीं होगा जिसकी आपको उम्मीद है। जो लोग जॉब करते हैं, उन्हें सामान्य समय से लगभग 30 मिनट पहले उठने का अतिरिक्त प्रयास करना चाहिए ताकि वे बिना किसी जल्दबाज़ी के ध्यान कर सकें। जो लोग घर पर रहते हैं, वे सुबह के प्रारंभिक कार्य—जैसे टिफ़िन बनाना और परिवार के लोगों को काम/स्कूल/कॉलेज के लिए भेजना — पूरा करने के बाद ध्यान कर सकते हैं। पहले ध्यान को ईश्वर द्वारा दिया गया एक नया और अनमोल अवसर समझना चाहिए, जो हमें चेतन बनने और अपने उच्चतर स्वरूप की ओर आगे बढ़ने का मार्ग बताता है।
दिनभर के कार्य करते समय साधकों को यह भी याद रखना चाहिए कि गुरु सियाग ने आध्यात्मिक प्रगति के बारे में कहा है: “जप (चैंटिंग) आध्यात्मिक परिवर्तन की कुंजी है।” इसलिए आध्यात्मिक रूप से जागरूक बनने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए साधक को पूरे दिन यथासंभव अधिक से अधिक गुरु सियाग के मंत्र का जप करना चाहिए। जिस प्रकार रोशनी या हवा पाने के लिए आप बिजली का स्विच ऑन करते हो, उसी प्रकार मंत्र जाप याद आना आपका आध्यात्मिक स्विच है, जिसे ऑन (यानी मंत्र जाप) करते ही समस्या मिटना आरम्भ हो जाती है|

